Shayri

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रात भर सर्द हवा चलती रही
रात भर हमने अलाव तापा
मैंने माजी से कई खुश्क सी शाखें काटीं
तुमने भी गुजरे हुये लम्हों के पत्ते तोड़े
मैंने जेबों से निकालीं सभी सूखीं नज़्में
तुमने भी हाथों से मुरझाये हुये खत खोलें
अपनी इन आंखों से मैंने कई मांजे तोड़े
और हाथों से कई बासी लकीरें फेंकी
तुमने पलकों पे नामी सूख गयी थी, सो गिरा दी |

रात भर जो भी मिला उगते बदन पर हमको
काट के दाल दिया जलाते अलावों मसं उसे
रात भर फून्कों से हर लोऊ को जगाये रखा
और दो जिस्मों के ईंधन को जलाए रखा
रात भर बुझते हुए रिश्ते को तापा हमने |

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शाम से आँख में नमी सी है 
आज फिर आप की कमी सी है

दफ़्न कर दो हमें कि साँस मिले 
नब्ज़ कुछ देर से थमी सी है

वक़्त रहता नहीं कहीं छुपकर 
इस की आदत भी आदमी सी है

कोई रिश्ता नहीं रहा फिर भी 
एक तस्लीम लाज़मी सी है

रिश्ते बस रिश्ते होते हैं
कुछ इक पल के
कुछ दो पल के

कुछ परों से हल्के होते हैं
बरसों के तले चलते-चलते
भारी-भरकम हो जाते हैं

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રસ્તા ઘણા છે ને મંઝીલ એક છે
ભગવાન એક છે ને હજાર સવાલ છે
હઝાર ફૂલ છે ને એક માળી છે

સાલું કેટલું ગજબ છે કે…..
તકદીર હાથ માં છે ને હાથ ખાલી છે

Author Hitendra Vasudev Read More...

साँस लेना भी कैसी आदत है 
जीये जाना भी क्या रवायत है 
कोई आहट नहीं बदन में कहीं 
कोई साया नहीं है आँखों में 
पाँव बेहिस हैं, चलते जाते हैं 
इक सफ़र है जो बहता रहता है 
कितने बरसों से, कितनी सदियों से 
जिये जाते हैं, जिये जाते हैं

आदतें भी अजीब होती हैं

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आदतन तुम ने कर िदये वादे 
आदतन हम ने ऐतबार िकया

तेरी राहों में हर बार रुक कर 
हम ने अपना ही इन्तज़ार िकया

अब ना माँगेंगे िजन्दगी या रब 
ये गुनाह हम ने एक बार िकया
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खुशबू जैसे लोग मिले अफ़साने में
एक पुराना खत खोला अनजाने में

जाना किसका ज़िक्र है इस अफ़साने में
दर्द मज़े लेता है जो दुहराने में

शाम के साये बालिस्तों से नापे हैं
चाँद ने कितनी देर लगा दी आने में

रात गुज़रते शायद थोड़ा वक्त लगे
ज़रा सी धूप दे उन्हें मेरे पैमाने में

दिल पर दस्तक देने ये कौन आया है
किसकी आहट सुनता है वीराने मे ।
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हाथ छूटे भी तो रिश्ते नहीं छोड़ा करते 
वक़्त की शाख़ से लम्हें नहीं तोड़ा करते

जिस की आवाज़ में सिलवट हो निगाहों में शिकन 
ऐसी तस्वीर के टुकड़े नहीं जोड़ा करते

शहद जीने का मिला करता है थोड़ा थोड़ा 
जाने वालों के लिये दिल नहीं थोड़ा करते

तूने आवाज़ नहीं दी कभी मुड़कर वरना
हम कई सदियाँ तुझे घूम के देखा करते

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ना वक्त इतना हैं कि सिलेबस पूरा किया जाए;

ना तरकीब कोई की एग्जाम पास किया जाए;
ना जाने कौन सा दर्द दिया है इस पढ़ाई ने;
ना रोया जाय और ना सोया जाए।

 

मेरी वफाएं सभी लोग जानते हैं;

उसकी जफ़ाएं सभी लोग जानते हैं;
वो ही ना समझ पाए मेरी शायरी;
दिल की सदाएं सभी लोग जानते है।

 

तन्हा रहना तो सीख लिया हमने,

लेकिन खुश कभी ना रह पाएंगे,
तेरी दूरी तो फिर भी सह लेता ये दिल,
लेकिन तेरी मोहब्बत के बिना ना जी पाएंगे.

 

उम्र की राह में जज्बात बदल जाते है।

वक़्त की आंधी में हालात बदल जाते है
सोचता हूं काम कर-कर के रिकॉर्ड तोड़ दूं।
कमबख्त सैलेरी देख के ख्यालात बदल जाते हैं

 

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Safar zindagi ka bahut hi hassen hai
Sabhi ko kisi na kisi ki talash hain
Kisi ke pas manjil hain to raah nahi
Aur jiske paas raah h to manjil nahi

Author Hitendra Vasudev Read More...

 અનુક્રમમાં હતાં નહીં એવાં ઘણાં પ્રકરણ નીકળ્યાં

ચહેરો સુંદર બતાવી એ દઝાડતાં દર્પણ નીકળ્યાં 
- ઉપેન્દ્ર 
 
 
 
 

एक पुराना मौसम लौटा याद भरी पुरवाई भी 
ऐसा तो कम ही होता है वो भी हो तनहाई भी

यादों की बौछारों से जब पलकें भीगने लगती हैं 
कितनी सौंधी लगती है तब माँझी की रुसवाई भी

दो दो शक़्लें दिखती हैं इस बहके से आईने में 
मेरे साथ चला आया है आप का इक सौदाई भी

ख़ामोशी का हासिल भी इक लम्बी सी ख़ामोशी है 
उन की बात सुनी भी हमने अपनी बात सुनाई भी

- ગુલઝાર

 

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