Shayri

Add Your Entry

અનુક્રમમાં ન હતાં...

Author: Gurjar Upendra

Date: 07-08-2015   Total Views : 257

 અનુક્રમમાં હતાં નહીં એવાં ઘણાં પ્રકરણ નીકળ્યાં

ચહેરો સુંદર બતાવી એ દઝાડતાં દર્પણ નીકળ્યાં 
- ઉપેન્દ્ર 
 
 
 
 

एक पुराना मौसम लौटा याद भरी पुरवाई भी 
ऐसा तो कम ही होता है वो भी हो तनहाई भी

यादों की बौछारों से जब पलकें भीगने लगती हैं 
कितनी सौंधी लगती है तब माँझी की रुसवाई भी

दो दो शक़्लें दिखती हैं इस बहके से आईने में 
मेरे साथ चला आया है आप का इक सौदाई भी

ख़ामोशी का हासिल भी इक लम्बी सी ख़ामोशी है 
उन की बात सुनी भी हमने अपनी बात सुनाई भी

- ગુલઝાર

 

Most Viewed Shayri

Most Viewed Author