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साँस लेना भी कैसी आदत है

Author: Gurjar Upendra

Date: 12-08-2015   Total Views : 266

साँस लेना भी कैसी आदत है 
जीये जाना भी क्या रवायत है 
कोई आहट नहीं बदन में कहीं 
कोई साया नहीं है आँखों में 
पाँव बेहिस हैं, चलते जाते हैं 
इक सफ़र है जो बहता रहता है 
कितने बरसों से, कितनी सदियों से 
जिये जाते हैं, जिये जाते हैं

आदतें भी अजीब होती हैं

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