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शाम से आँख में नमी सी है

Author: Gurjar Upendra

Date: 13-08-2015   Total Views : 250

शाम से आँख में नमी सी है 
आज फिर आप की कमी सी है

दफ़्न कर दो हमें कि साँस मिले 
नब्ज़ कुछ देर से थमी सी है

वक़्त रहता नहीं कहीं छुपकर 
इस की आदत भी आदमी सी है

कोई रिश्ता नहीं रहा फिर भी 
एक तस्लीम लाज़मी सी है

रिश्ते बस रिश्ते होते हैं
कुछ इक पल के
कुछ दो पल के

कुछ परों से हल्के होते हैं
बरसों के तले चलते-चलते
भारी-भरकम हो जाते हैं

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