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दिन कुछ ऐसे गुज़ारता है कोई

Author: Gurjar Upendra

Date: 19-08-2015   Total Views : 255

दिन कुछ ऐसे गुज़ारता है कोई 
जैसे एहसान उतारता है कोई

आईना देख के तसल्ली हुई 
हम को इस घर में जानता है कोई

पक गया है शज़र पे फल शायद 
फिर से पत्थर उछलता है कोई

फिर नज़र में लहू के छींटे हैं 
तुम को शायद मुघालता है कोई

देर से गूँजतें हैं सन्नाटे 
जैसे हम को पुकारता है कोई

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